अध्ययन लेख 25
गीत 96 याह की पवित्र किताब—एक खज़ाना
याकूब की भविष्यवाणी से हम क्या सीख सकते हैं—भाग 2
“उसने हरेक को वैसा आशीर्वाद दिया जिसके वह योग्य था।”—उत्प. 49:28.
क्या सीखेंगे?
याकूब ने मरने से पहले जबूलून, इस्साकार, दान, गाद, आशेर, नप्ताली, यूसुफ और बिन्यामीन के बारे में जो भविष्यवाणी की थी, उससे हम क्या सीख सकते हैं?
1. इस लेख में हम किस बारे में चर्चा करेंगे?
याकूब के 12 बेटे उसके पास इकट्ठा हैं। वह एक-एक करके उन्हें आशीष दे रहा है और सब बड़े ध्यान से उसकी बातें सुन रहे हैं। पिछले लेख में हमने देखा था कि उसने अपने बेटे रूबेन, शिमोन, लेवी और यहूदा को आशीषें दी थीं। उसकी बातें सुनकर सभी बेटे हैरान-परेशान थे। अब वे सोच रहे होंगे कि उनका पिता बाकी आठ बेटों से क्या कहेगा। इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि याकूब ने जबूलून, इस्साकार, दान, गाद, आशेर, नप्ताली, यूसुफ और बिन्यामीन से क्या कहा और उससे हम क्या सीख सकते हैं। a
जबूलून
2. याकूब ने जबूलून के बारे में क्या भविष्यवाणी की और वह कैसे पूरी हुई? (उत्पत्ति 49:13) ( बक्स भी देखें।)
2 उत्पत्ति 49:13 पढ़िए। याकूब की बातों से पता चलता है कि जबूलून के गोत्र को वादा किए गए देश के उत्तर में समुंदर के किनारे इलाका मिलता। करीब 200 साल बाद ऐसा ही हुआ। जबूलून के गोत्र को गलील सागर और भूमध्य सागर के बीच का इलाका दिया गया। मूसा ने भविष्यवाणी की थी, “हे जबूलून, तू बाहर जाते समय खुशियाँ मना।” (व्यव. 33:18) इस भविष्यवाणी का क्या मतलब था? शायद यह कि जबूलून के लोगों के लिए व्यापार करना बहुत आसान होगा, क्योंकि उनका इलाका दो समुद्रों के बीच था। जो भी हो, एक बात तो है, जबूलून के वंशजों के पास खुश रहने की वजह थी।
3. हम खुश रहने के लिए क्या कर सकते हैं?
3 हम इससे क्या सीखते हैं? हम चाहे जहाँ पर भी रहते हों या हमारे हालात चाहे जैसे भी हों, हम सबके पास खुश रहने की कोई-न-कोई वजह ज़रूर है। खुश रहने के लिए ज़रूरी है कि हमारे पास जो कुछ है उसमें हम संतुष्ट रहें। (भज. 16:6; 24:5) कभी-कभी हम उन चीज़ों के बारे में सोचने लगते हैं जो हमारे पास नहीं हैं और इस वजह से दुखी हो जाते हैं। ऐसा करने के बजाय हमें उन चीज़ों के बारे में सोचना चाहिए जो हमारे पास हैं। अगर हम ऐसा करें तो हम खुश रहेंगे, फिर चाहे हमारे हालात जैसे भी हों।—गला. 6:4.
इस्साकार
4. याकूब ने इस्साकार के बारे में क्या भविष्यवाणी की और वह कैसे पूरी हुई? (उत्पत्ति 49:14, 15) ( बक्स भी देखें।)
4 उत्पत्ति 49:14, 15 पढ़िए। याकूब ने इस्साकार की तारीफ की, क्योंकि वह बहुत मेहनती था। याकूब ने उसकी तुलना एक बलवान गधे से की जो भारी-से-भारी बोझ उठा सकता है। याकूब ने यह भी कहा कि इस्साकार को विरासत में बढ़िया ज़मीन मिलेगी और ऐसा ही हुआ। इस्साकार के वंशजों को यरदन नदी के पास बहुत ही अच्छी और उपजाऊ ज़मीन दी गयी। (यहो. 19:22) उन्होंने वहाँ खेती-बाड़ी करने के लिए ज़रूर कड़ी मेहनत की होगी। यही नहीं, वे दूसरों की मदद करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे। (1 राजा 4:7, 17) जैसे, जब न्यायी बाराक और भविष्यवक्तिन दबोरा ने युद्ध के लिए इसराएलियों को बुलाया, तो इस्साकार का गोत्र मदद करने के लिए आगे आया। दूसरे मौकों पर भी वे दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार थे।—न्यायि. 5:15.
5. हमें क्यों कड़ी मेहनत करनी चाहिए?
5 हम इससे क्या सीखते हैं? इस्साकार के गोत्र की कड़ी मेहनत के लिए यहोवा ने उनकी कदर की। उसी तरह आज हम यहोवा की सेवा में जो भी मेहनत करते हैं, उसकी वह बहुत कदर करता है। (सभो. 2:24) ज़रा उन भाइयों के बारे में सोचिए जो मंडली का खयाल रखते हैं। (1 तीमु. 3:1) वे सचमुच की कोई लड़ाई तो नहीं लड़ते, लेकिन परमेश्वर की भेड़ों की हिफाज़त करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। (1 कुरिं. 5:1, 5; यहू. 17-23) वे भाषण और दूसरे भाग तैयार करने में भी कड़ी मेहनत करते हैं, ताकि भाई-बहनों का हौसला बढ़ा सकें।—1 तीमु. 5:17.
दान
6. दान के गोत्र को कौन-सा काम मिला था? (उत्पत्ति 49:17, 18) ( बक्स भी देखें।)
6 उत्पत्ति 49:17, 18 पढ़िए। याकूब ने दान की तुलना एक ऐसे साँप से की जो बड़े-बड़े जानवरों से भी नहीं डरता। वह युद्ध के घोड़ों और उनके सवारों पर भी हमला करने के लिए तैयार रहता है। इससे पता चलता है कि दान के लोग बहुत हिम्मतवाले होते और इसराएल के बड़े-बड़े दुश्मनों का डटकर सामना करते। जब इसराएली वादा किए गए देश की तरफ जा रहे थे, तब दान का गोत्र ‘सब गोत्रों की हिफाज़त करने के लिए सबसे पीछे चला।’ (गिन. 10:25) ज़्यादातर इसराएली नहीं देख सकते थे कि दान के लोग उनकी खातिर क्या कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जो काम सौंपा गया था, वह बहुत ज़रूरी था।
7. यहोवा की सेवा में हमें चाहे जो भी काम मिले, हमें क्या याद रखना चाहिए?
7 हम इससे क्या सीखते हैं? क्या आपने कभी कोई ऐसा काम किया है जिस पर लोगों ने ध्यान ही नहीं दिया? जैसे, क्या आपने राज-घर की साफ-सफाई करने में या उसका रख-रखाव करने में हाथ बँटाया है? या फिर सम्मेलन या अधिवेशन में स्वंयसेवक का काम किया है या कोई और ज़िम्मेदारी निभायी है? अगर हाँ, तो यह बहुत अच्छी बात है! हमेशा याद रखिए कि आप यहोवा के लिए जो भी करते हैं, वह उस पर ध्यान देता है और उसकी कदर करता है। और जब आप प्यार की खातिर यहोवा के लिए कुछ करते हैं, ना कि लोगों से तारीफ पाने के लिए तो यहोवा को और भी खुशी होती है।—मत्ती 6:1-4.
गाद
8. दुश्मनों के लिए गाद के गोत्र पर हमला करना क्यों आसान था? (उत्पत्ति 49:19) ( बक्स भी देखें।)
8 उत्पत्ति 49:19 पढ़िए। याकूब ने भविष्यवाणी की कि गाद पर लुटेरा-दल हमला करेगा। इसके करीब 200 साल बाद गाद के गोत्र को यरदन नदी के पूरब में इलाका दिया गया। उनका इलाका जहाँ खत्म होता था, वहाँ से दुश्मनों का इलाका शुरू होता था। इसलिए यह खतरा था कि दुश्मन कभी-भी उन पर हमला बोल सकते थे। लेकिन गाद के लोग उसी इलाके में रहना चाहते थे, क्योंकि वहाँ उनके मवेशियों के लिए काफी चरागाह थे। (गिन. 32:1, 5) ऐसा मालूम होता है कि गाद के लोग बहुत हिम्मतवाले थे। लेकिन उन्हें अपनी ताकत से ज़्यादा यहोवा पर भरोसा था। वे जानते थे कि यहोवा उन्हें दुश्मनों से बचा सकता है और लुटेरे-दलों से उनकी हिफाज़त कर सकता है। इतना ही नहीं, जब बाकी गोत्र यरदन के पश्चिम में वादा किए गए देश पर कब्ज़ा करने गए, तो गाद के गोत्र ने उनकी मदद करने के लिए अपने सैनिकों को भेजा। (गिन. 32:16-19) उन्हें पूरा यकीन था कि सैनिकों की गैर-हाज़िरी में यहोवा उनके बीवी-बच्चों की रक्षा करेगा। उन्होंने जिस तरह हिम्मत से काम लिया और जो त्याग किए, उसके लिए यहोवा ने उन्हें बहुत आशीषें दीं।—यहो. 22:1-4.
9. अगर हमें यहोवा पर भरोसा होगा, तो हम क्या करेंगे?
9 हम इससे क्या सीखते हैं? अगर हम मुश्किल हालात में भी यहोवा की सेवा करना चाहते हैं, तो उस पर भरोसा रखना बहुत ज़रूरी है। (भज. 37:3) आज कई भाई-बहन यहोवा पर भरोसा रखते हैं और उसकी सेवा के लिए बहुत-से त्याग करते हैं। जैसे कुछ भाई-बहन संगठन के निर्माण काम में हाथ बँटाते हैं, कुछ वहाँ जाकर सेवा करते हैं जहाँ प्रचारकों की ज़्यादा ज़रूरत है और कुछ दूसरी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं। वे यह सब त्याग इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा है कि यहोवा हमेशा उनका खयाल रखेगा।—भज. 23:1.
आशेर
10. आशेर का गोत्र क्या करने से चूक गया? (उत्पत्ति 49:20) ( बक्स भी देखें।)
10 उत्पत्ति 49:20 पढ़िए। याकूब ने भविष्यवाणी की थी कि आशेर का गोत्र फलेगा-फूलेगा और बिलकुल ऐसा ही हुआ। आशेर के गोत्र को जो इलाका दिया गया, वह पूरे इसराएल का सबसे उपजाऊ इलाका था। (व्यव. 33:24) साथ ही, उनके इलाके की पश्चिमी सरहद पर भूमध्य सागर था और वहाँ पर सीदोन का बंदरगाह भी था जहाँ फिनीके के अमीर व्यापारी खूब लेन-देन करते थे। लेकिन आशेर के लोग एक काम करने से चूक गए। उन्होंने कनानियों को अपने देश से नहीं खदेड़ा। (न्यायि. 1:31, 32) इस वजह से कनानियों का उन पर बुरा असर हुआ। यहीं नहीं, ऐसा लगता है कि उन्हें अपनी धन-दौलत से इतना लगाव हो गया था कि सच्ची उपासना के लिए उनका जोश कम हो गया। जब न्यायी बाराक ने कनानियों से लड़ने के लिए सभी गोत्रों को बुलाया, तो आशेर के गोत्र ने अपना कोई आदमी नहीं भेजा। इसलिए आशेर के लोग उस शानदार जीत को देखने से चूक गए जो यहोवा ने “मगिद्दो के सोतों के पास” अपने लोगों को दिलायी थी। (न्यायि. 5:19-21) इस जीत के बाद बाराक और दबोरा ने परमेश्वर की प्रेरणा से एक विजय गीत गाया जिसमें उन्होंने कहा, “आशेर समुंदर किनारे हाथ-पर-हाथ धरे बैठा रहा।” (न्यायि. 5:17) ज़रा सोचिए, यह सुनकर आशेर के लोगों को कितनी शर्म आयी होगी!
11. हमें पैसों के बारे में सही सोच क्यों रखनी चाहिए?
11 हम इससे क्या सीखते हैं? हम तन-मन से यहोवा की सेवा करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि हम दुनिया की सोच से दूर रहें। दुनिया के लोग सोचते हैं कि पैसा और ऐशो-आराम की चीज़ें ही सबकुछ है और वे इन्हीं को बटोरने में लगे रहते हैं। (नीति. 18:11) मगर हम पैसों के बारे में सही सोच रखने की कोशिश करते हैं। (सभो. 7:12; इब्रा. 13:5) हम अपना पूरा समय और ताकत धन-दौलत और चीज़ें बटोरने में नहीं लगा देते। वह इसलिए कि हम पूरे जी-जान से यहोवा की सेवा करना चाहते हैं। और हम जानते हैं कि बहुत जल्द वह हमें एक शानदार जीवन देगा जहाँ हमें कोई कमी नहीं होगी।—भज. 4:8.
नप्ताली
12. याकूब ने नप्ताली के बारे में जो भविष्यवाणी की थी, वह कैसे पूरी हुई? (उत्पत्ति 49:21) ( बक्स भी देखें।)
12 उत्पत्ति 49:21 पढ़िए। याकूब ने नप्ताली के गोत्र के बारे में कहा कि “उसके बोल मनभावने” होंगे। इसका शायद यह मतलब था कि जब यीशु धरती पर आता, तो उसकी बातें कैसी होतीं। यीशु ने कफरनहूम में लोगों को सिखाने में काफी वक्त बिताया था, इसलिए इस शहर को उसका ‘अपना शहर’ कहा गया है। गौर करनेवाली बात है कि कफरनहूम नप्ताली गोत्र के इलाके में ही था। (मत्ती 4:13; 9:1; यूह. 7:46) यशायाह ने भी यीशु के बारे में भविष्यवाणी की थी कि जबूलून और नप्ताली के लोग “तेज़ रौशनी” देखेंगे। (यशा. 9:1, 2) यीशु ही ‘वह सच्ची रौशनी था जो सब किस्म के इंसानों को रौशनी देता।’—यूह. 1:9.
13. हम अपनी बोली से यहोवा को कैसे खुश कर सकते हैं?
13 हम इससे क्या सीख सकते हैं? यहोवा ध्यान देता है कि हम लोगों से क्या कहते हैं और किस तरह कहते हैं। तो अगर हम चाहते हैं कि हमारे “बोल मनभावने” हों और उनसे यहोवा खुश हो, तो हम क्या कर सकते हैं? हमें हमेशा सच बोलना चाहिए। (भज. 15:1, 2) हमें अपनी बातों से दूसरों का हौसला बढ़ाना चाहिए। दूसरों में कमियाँ ढूँढ़ने के बजाय हमें उनकी अच्छाइयों पर ध्यान देना चाहिए और उसके लिए उनकी तारीफ करनी चाहिए। (इफि. 4:29) यही नहीं, हमें बातचीत शुरू करने का अपना हुनर भी बढ़ाना चाहिए, ताकि लोगों को अच्छी तरह गवाही दे पाएँ।
यूसुफ
14. याकूब ने यूसुफ के बारे में जो भविष्यवाणी की थी, वह कैसे पूरी हुई? (उत्पत्ति 49:22, 26) ( बक्स भी देखें।)
14 उत्पत्ति 49:22, 26 पढ़िए। याकूब को ज़रूर अपने बेटे यूसुफ पर बहुत नाज़ होगा, क्योंकि यहोवा ने उसे “अपने भाइयों में से अलग किया” था। याकूब ने कहा कि “यूसुफ एक फलदार पेड़ की टहनी है।” इसका क्या मतलब था? वह फलदार पेड़ खुद याकूब था और यूसुफ उसकी टहनी था। और यह सही भी था, क्योंकि यूसुफ याकूब की प्यारी पत्नी राहेल का पहलौठा बेटा था। याकूब ने यह भी कहा कि यूसुफ को उसकी विरासत में दुगना हिस्सा मिलेगा। (उत्प. 48:5, 6; 1 इति. 5:1, 2) वैसे तो यह लिआ के पहलौठे बेटे रूबेन को मिलना चाहिए था, लेकिन उसने वह हक गँवा दिया था। याकूब की भविष्यवाणी कैसे पूरी हुई? यूसुफ के बेटे एप्रैम और मनश्शे से इसराएल के दो गोत्र बने। और दोनों गोत्रों को विरासत में अपना-अपना इलाका मिला।—उत्प. 49:25; यहो. 14:4.
15. जब यूसुफ के साथ नाइंसाफी हुई, तो उसने क्या किया?
15 याकूब ने भविष्यवाणी में यह भी बताया कि तीरंदाज़ ‘यूसुफ पर तीर चलाएँगे और मन में उसके खिलाफ दुश्मनी पालेंगे।’ (उत्प. 49:23) ये तीरंदाज़ यूसुफ के भाई थे, जो उससे जलते थे। उन्होंने उसके साथ नाइंसाफी की थी और इस वजह से यूसुफ को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। लेकिन फिर भी उसने अपने भाइयों के लिए और यहोवा के लिए अपने दिल में कड़वाहट नहीं पाली। इसके बजाय जैसा याकूब ने कहा था, “[यूसुफ की] कमान नहीं डगमगायी, उसके हाथ मज़बूत बने रहे और फुर्ती से चलते रहे।” (उत्प. 49:24) मुश्किल-से-मुश्किल हालात में भी यूसुफ ने यहोवा पर भरोसा रखा। उसने ना सिर्फ अपने भाइयों को माफ किया, बल्कि उनके साथ प्यार से पेश आया। (उत्प. 47:11, 12) आग जैसी परीक्षाओं ने यूसुफ को और भी निखार दिया। (भज. 105:17-19) और इस वजह से यहोवा ने उसके ज़रिए बड़े-बड़े काम करवाए।
16. जब हम पर आज़माइशें आती हैं, तो हम यूसुफ की तरह क्या कर सकते हैं?
16 हम इससे क्या सीख सकते हैं? जब मुश्किलें आती हैं, तो यहोवा से और अपने भाई-बहनों से दूरियाँ मत बना लीजिए। याद रखिए, जब हम पर आज़माइशें आती हैं, तो यहोवा हमें प्रशिक्षण दे रहा होता है। (इब्रा. 12:7, फु.) इससे हम और भी निखर पाते हैं, अपने अंदर अच्छे गुण बढ़ा पाते हैं। जैसे, हम दयालु बनते हैं और माफ करना सीखते हैं। (इब्रा. 12:11) हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमारे धीरज के लिए हमें ज़रूर इनाम देगा, ठीक जैसे उसने यूसुफ को दिया था।
बिन्यामीन
17. याकूब ने बिन्यामीन के बारे में जो भविष्यवाणी की, वह कैसे पूरी हुई? (उत्पत्ति 49:27) ( बक्स भी देखें।)
17 उत्पत्ति 49:27 पढ़िए। याकूब ने बिन्यामीन के गोत्र की तुलना एक भेड़िए से की जो बिना डरे अपने दुश्मनों पर हमला करता है। (न्यायि. 20:15, 16; 1 इति. 12:2) याकूब ने कहा, “सुबह वह अपना शिकार खाएगा।” “सुबह” का क्या मतलब है? जब इसराएल में राजाओं का दौर शुरू हुआ, तो सबसे पहला राजा शाऊल था जो बिन्यामीन के गोत्र से था। वह एक वीर योद्धा था और उसने पलिश्तियों के खिलाफ कई लड़ाइयाँ लड़ी थीं। (1 शमू. 9:15-17, 21) याकूब ने बिन्यामीन के बारे में यह भी कहा कि वह “शाम को लूट का माल बाँटेगा।” “शाम” का क्या मतलब है? जब राजाओं का दौर खत्म हो गया था और इसराएली फारस की हुकूमत के अधीन थे, तब पूरी इसराएल जाति को मिटाने की साज़िश रची गयी। लेकिन रानी एस्तेर और प्रधानमंत्री मोर्दकै ने, जो बिन्यामीन गोत्र से थे, उस साज़िश को नाकाम कर दिया और इसराएलियों की जान बचा ली।—एस्ते. 2:5-7; 8:3; 10:3.
18. हम कैसे दिखा सकते हैं कि हम बिन्यामीन के लोगों की तरह वफादार हैं?
18 हम इससे क्या सीख सकते हैं? बिन्यामीन के लोगों को यह देखकर बहुत खुशी हुई होगी कि उनके गोत्र से इसराएल का पहला राजा चुना गया, जैसा याकूब ने भविष्यवाणी की थी। लेकिन जब अगला राजा यहूदा के गोत्र से चुना गया, जो कि दाविद था, तो आगे चलकर बिन्यामीन के गोत्र ने उसका पूरा साथ दिया। (2 शमू. 3:17-19) और सालों बाद जब इसराएल के सभी गोत्रों ने यहूदा के गोत्र से बगावत की, तो बिन्यामीन के गोत्र ने यहूदा के गोत्र का साथ दिया। वे यहोवा के चुने हुए राजा के वफादार रहे। (1 राजा 11:31, 32; 12:19, 21) आइए हम भी बिन्यामीन के लोगों की तरह उन भाइयों का पूरा साथ दें जिन्हें यहोवा अपने लोगों की अगुवाई करने के लिए चुनता है।—1 थिस्स. 5:12.
19. याकूब की भविष्यवाणी से हमने क्या सीखा?
19 याकूब ने अपनी मौत से पहले जो भविष्यवाणी की थी, उससे हमने बहुत कुछ सीखा। इस पर चर्चा करके हमारा विश्वास बढ़ गया है कि परमेश्वर के वचन में लिखी दूसरी भविष्यवाणियाँ भी ज़रूर पूरी होंगी। और याकूब ने अपने बेटों से जो कहा, उससे हमने जाना कि यहोवा का दिल खुश करने के लिए हम क्या कर सकते हैं।
गीत 128 आखिर तक धीरज धरें
a याकूब ने सबसे पहले अपने बड़े बेटे रूबेन को, फिर दूसरे और तीसरे बेटे शिमोन और लेवी को और फिर अपने चौथे बेटे यहूदा को आशीष दी। लेकिन बाकी बेटों को उसने इस हिसाब से आशीष नहीं दी कि कौन बड़ा है और कौन छोटा है।