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अध्ययन लेख 24

गीत 98 परमेश्‍वर की प्रेरणा से लिखा शास्त्र

याकूब की भविष्यवाणी से हम क्या सीख सकते हैं—भाग 1

याकूब की भविष्यवाणी से हम क्या सीख सकते हैं—भाग 1

“तुम सब मेरे पास इकट्ठा हो जाओ, मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि आगे चलकर तुम्हारे साथ क्या-क्या होगा।”उत्प. 49:1.

क्या सीखेंगे?

याकूब ने मरने से पहले रूबेन, शिमोन, लेवी और यहूदा के बारे में जो भविष्यवाणी की, उससे हम क्या सीख सकते हैं?

1-2. मरने से पहले याकूब क्या करता है और क्यों? (तसवीर भी देखें।)

 परमेश्‍वर का वफादार सेवक याकूब अपने परिवार के साथ मिस्र में रह रहा है। उसे कनान से यहाँ आए करीब 17 साल हो चुके हैं। (उत्प. 47:28) यहाँ आकर वह अपने प्यारे बेटे यूसुफ से मिला था। और अब वह अपने पूरे परिवार के साथ यहाँ खुशी-खुशी रह रहा है। लेकिन याकूब बहुत बूढ़ा हो चुका है और वह जानता है कि वह ज़्यादा समय नहीं जीएगा। इसलिए वह अपने पूरे परिवार को बुलाता है और उनसे कुछ ज़रूरी बातें कहता है।—उत्प. 49:28.

2 उस ज़माने में यह दस्तूर था कि जब घर का मुखिया मरनेवाला होता था, तो वह अपने परिवारवालों को कुछ ज़रूरी हिदायतें देता था। (यशा. 38:1) वह शायद यह भी बताता था कि उसके मरने के बाद कौन घर का मुखिया होगा।

याकूब अपनी मौत से पहले अपने 12 बेटों के सामने भविष्यवाणी कर रहा है (पैराग्राफ 1-2)


3. याकूब ने अपने बेटों से जो बात कही, वह क्यों बहुत मायने रखती थी? (उत्पत्ति 49:1, 2)

3 उत्पत्ति 49:1, 2 पढ़िए। लेकिन याकूब ने सिर्फ कुछ ज़रूरी हिदायतें देने के लिए अपने परिवार को नहीं बुलाया था। असल में वह एक भविष्यवक्‍ता था और यहोवा परमेश्‍वर उसके ज़रिए आगे आनेवाले समय के लिए कुछ भविष्यवाणियाँ करना चाहता था। इन भविष्यवाणियों का याकूब के वंशजों पर बहुत गहरा असर होनेवाला था।

4. याकूब ने मरने से पहले किस बारे में भविष्यवाणी की और हमें उस पर क्यों गौर करना चाहिए? (“याकूब का परिवार” नाम का बक्स भी देखें।)

4 इस लेख में हम जानेंगे कि याकूब ने मरने से पहले अपने चार बेटों से, यानी रूबेन, शिमोन, लेवी और यहूदा से क्या कहा। और अगले लेख में हम जानेंगे कि उसने अपने बाकी आठ बेटों से क्या कहा। हम देखेंगे कि याकूब ने ना सिर्फ अपने बेटों के बारे में, बल्कि उनके वंशजों के बारे में भी भविष्यवाणी की। आगे चलकर इन्हीं वंशजों से इसराएल राष्ट्र बना। अगर हम इसराएल राष्ट्र के इतिहास पर गौर करें, तो हम समझ पाएँगे कि याकूब की भविष्यवाणी का एक-एक शब्द कैसे पूरा हुआ। इससे हम कुछ ज़रूरी बातें भी सीख पाएँगे और जान पाएँगे कि हम अपने पिता यहोवा को कैसे खुश कर सकते हैं।

रूबेन

5. रूबेन अपने पिता से शायद क्या पाने की उम्मीद कर रहा था?

5 याकूब ने सबसे पहले रूबेन से बात की। उसने कहा, “तू मेरा पहलौठा है।” (उत्प. 49:3) पहलौठा होने की वजह से रूबेन शायद यह उम्मीद कर रहा था कि उसे अपने पिता की विरासत में दुगना हिस्सा मिलेगा। वह शायद यह भी सोच रहा होगा कि अपने पिता की मौत के बाद वही पूरे खानदान का मुखिया बनेगा और आगे चलकर उसके बच्चों को भी यही सम्मान मिलेगा।

6. रूबेन ने पहलौठे का हक कैसे खो दिया? (उत्पत्ति 49:3, 4)

6 लेकिन रूबेन ने पहलौठे का हक खो दिया। (1 इति. 5:1) वह कैसे? राहेल ने अपने पति याकूब को अपनी दासी बिल्हा दी थी ताकि वह उसकी पत्नी बने। लेकिन रूबेन ने बिल्हा के साथ संबंध रखे और इस वजह से उसने पहलौठे का हक गँवा दिया। (उत्प. 35:19, 22) उसने यह बुरा काम क्यों किया? शायद रूबेन चाहता था कि याकूब अपनी उप-पत्नी बिल्हा से नफरत करने लगे और अपनी पहली पत्नी लिआ से ज़्यादा प्यार करे, क्योंकि लिआ रूबेन की माँ थी। या यह भी हो सकता है कि रूबेन ने अपनी हवस पूरी करने के लिए बिल्हा के साथ नाजायज़ संबंध रखे थे। जो भी वजह रही हो, रूबेन ने जो किया उससे यहोवा को और उसके पिता याकूब को बहुत दुख हुआ।—उत्पत्ति 49:3, 4 पढ़िए।

7. रूबेन और उसके वंशजों के साथ क्या हुआ? (“ याकूब की भविष्यवाणी जो उसने मरने से पहले की थी” नाम का बक्स भी देखें।)

7 याकूब ने रूबेन से कहा, “तू औरों से आगे नहीं बढ़ पाएगा।” उसकी यह बात बिलकुल सच निकली। रूबेन का कोई भी वंशज ना तो राजा बना, ना याजक और ना ही भविष्यवक्‍ता। लेकिन याकूब ने अपने बेटे रूबेन को यूँ ही नहीं छोड़ दिया। उसने उसे भी विरासत में हिस्सा दिया। आगे चलकर रूबेन के वंशजों से इसराएल का एक पूरा गोत्र बना। (यहो. 12:6) हालाँकि रूबेन से गलतियाँ हुईं, लेकिन उसने कई मौकों पर अच्छे गुण भी दिखाए और ऐसा मालूम होता है कि उसने फिर कभी किसी के साथ नाजायज़ संबंध नहीं रखे।—उत्प. 37:20-22; 42:37.

8. रूबेन के किस्से से हम क्या सीख सकते हैं?

8 हम इससे क्या सीखते हैं? हमें अपनी गलत इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए और ठान लेना चाहिए कि हम नाजायज़ यौन-संबंध से दूर रहेंगे। अगर हमें गलत काम करने के लिए लुभाया जाए, तो हमें थोड़ा रुककर सोचना चाहिए कि ऐसा करने से यहोवा को, हमारे परिवारवालों को और दूसरों को कितना दुख पहुँचेगा। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि “एक इंसान जो बोता है, वही काटेगा भी।” (गला. 6:7) हम रूबेन के किस्से से एक और बात सीखते हैं। वह यह कि यहोवा दया करनेवाला परमेश्‍वर है। हालाँकि वह हमें अपनी गलतियों के बुरे अंजामों से नहीं बचाता, लेकिन अगर हम पश्‍चाताप करें और सही काम करने की कोशिश करें, तो वह हमें माफ करता है और आशीषें देता है।

शिमोन और लेवी

9. याकूब शिमोन और लेवी से क्यों खुश नहीं था? (उत्पत्ति 49:5-7)

9 उत्पत्ति 49:5-7 पढ़िए। रूबेन के बाद याकूब शिमोन और लेवी से बात करता है। याकूब की बातों से पता चलता है कि वह उन दोनों से बिलकुल खुश नहीं था। सालों पहले शेकेम नाम के एक कनानी आदमी ने याकूब की बेटी दीना का बलात्कार किया था। इस बात को लेकर याकूब के सभी बेटों को बहुत गुस्सा आया, लेकिन शिमोन और लेवी ने अपने गुस्से पर काबू नहीं रखा। उन्होंने एक साज़िश रची। उन्होंने शेकेम और उसके आदमियों से कहा कि अगर वे लोग खतना करवाएँगे, तो उनके और याकूब के घराने के बीच शांति बनी रहेगी। शेकेम और उसके आदमियों ने इस झूठ पर यकीन कर लिया और सबने खतना करवाया। फिर जब उनका दर्द से बुरा हाल था, तो शिमोन और लेवी “तलवारें लेकर शहर के अंदर आए। वे इस तरह आए कि किसी को उन पर शक नहीं हुआ। और उन्होंने शहर के सभी आदमियों का कत्ल कर दिया।”—उत्प. 34:25-29.

10. याकूब ने शिमोन और लेवी के बारे में जो भविष्यवाणी की, वह कैसे पूरी हुई? (“ याकूब की भविष्यवाणी जो उसने मरने से पहले की थी” नाम का बक्स भी देखें।)

10 याकूब को यह देखकर बहुत गुस्सा आया कि उसके दोनों बेटों ने इतने सारे लोगों का कत्ल कर दिया। उसने कहा कि उन दोनों को इसराएल में बिखेर दिया जाएगा और तित्तर-बित्तर कर दिया जाएगा। यह भविष्यवाणी 200 साल बाद जाकर पूरी हुई। जब इसराएल राष्ट्र वादा किए गए देश में गया, तो शिमोन के गोत्र को यहूदा के इलाके में अलग-अलग जगहों पर छोटे इलाके दिए गए। (यहो. 19:1) और लेवी के गोत्र को पूरे इसराएल में 48 शहर दिए गए जो यहाँ-वहाँ बिखरे हुए थे।—यहो. 21:41.

11. शिमोन और लेवी के गोत्र ने कौन-से अच्छे काम किए?

11 शिमोन और लेवी के वंशजों ने उनकी तरह गलतियाँ नहीं कीं। लेवी के गोत्र ने सच्ची उपासना का साथ दिया। जब यहोवा ने मूसा को कानून देने के लिए सीनै पहाड़ पर बुलाया, तो बहुत-से इसराएली बछड़े की उपासना करने में लग गए। लेकिन लेवियों ने ऐसा नहीं किया। फिर जब मूसा लौटकर आया, तो उन्होंने मूसा के साथ मिलकर बछड़े की उपासना करनेवालों को मौत के घाट उतार दिया। (निर्ग. 32:26-29) आगे चलकर यहोवा ने लेवी के गोत्र को चुना और उन्हें एक खास सम्मान दिया। उसने उन्हें इसराएल में याजक ठहराया। (निर्ग. 40:12-15; गिन. 3:11, 12) शिमोन के गोत्र ने भी परमेश्‍वर के मकसद के मुताबिक काम किया। उन्होंने कनानियों को वादा किए गए देश से खदेड़ने में यहूदा के गोत्र का साथ दिया।—न्यायि. 1:3, 17.

12. शिमोन और लेवी के किस्से से हम क्या सीख सकते हैं?

12 हम इससे क्या सीखते हैं? हमें कभी-भी गुस्से में आकर कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। अगर कोई हमारे साथ या हमारे किसी करीबी के साथ कुछ बुरा करता है, तो शायद हमें गुस्सा आ जाए। (भज. 4:4) लेकिन याद रखिए, अगर हम गुस्से में आकर उस व्यक्‍ति से कुछ बुरा कहें या उसके साथ कुछ बुरा करें, तो यह बात यहोवा को बिलकुल अच्छी नहीं लगेगी। (याकू. 1:20) चाहे भाई-बहन या बाहरवाले हमारे साथ कोई नाइंसाफी करें, हमें हमेशा बाइबल के सिद्धांत मानने चाहिए। फिर हम कभी-भी गुस्से में आकर कुछ ऐसा नहीं करेंगे जिससे दूसरों को नुकसान पहुँचे। (रोमि. 12:17, 19; 1 पत. 3:9) इसके अलावा हो सकता है, आपके माता-पिता कुछ ऐसा करें जो परमेश्‍वर को पसंद ना हो। पर आपको उनकी तरह बनने की ज़रूरत नहीं है। चाहे आपकी परवरिश कैसे भी माहौल में हुई हो, आप यहोवा को खुश कर सकते हैं। सही काम करने में यहोवा आपकी मदद करेगा और आपको इनाम भी देगा।

यहूदा

13. जब याकूब यहूदा से बात करने लगा, तो उसे किन बातों को लेकर चिंता हुई होगी?

13 अब याकूब अपने बेटे यहूदा से बात करता है। अब तक याकूब ने अपने दूसरे बेटों के बारे में जो कहा, वह सुनकर यहूदा थोड़ा परेशान हो गया होगा, क्योंकि उससे भी कुछ बड़ी गलतियाँ हुई थीं। ऐसा मालूम होता है कि शेकेम के शहर को लूटने में उसने भी अपने बड़े भाइयों का साथ दिया था। (उत्प. 34:27) उसने अपने भाइयों के साथ मिलकर यूसुफ को बेच दिया था और इस बारे में अपने पिता से झूठ भी बोला था। (उत्प. 37:31-33) और आगे चलकर उसने अपनी बहू तामार के साथ नाजायज़ संबंध रखे थे, यह सोचकर कि वह एक वेश्‍या है।—उत्प. 38:15-18.

14. याकूब ने यहूदा से क्या कहा और यहूदा ने कौन-से अच्छे काम किए थे? (उत्पत्ति 49:8, 9)

14 लेकिन यहूदा जैसा सोच रहा था वैसा नहीं हुआ। परमेश्‍वर की प्रेरणा से याकूब उसे सिर्फ आशीषें देता है और उसकी तारीफ करता है। (उत्पत्ति 49:8, 9 पढ़िए।) वैसे यहूदा ने ऐसे कौन-से अच्छे काम किए थे? वह अपने बुज़ुर्ग पिता याकूब की बहुत परवाह करता था और उसका खयाल रखता था। उसे अपने छोटे भाई बिन्यामीन से भी इतना प्यार था कि उसकी खातिर वह गुलाम बनने को भी तैयार था—उत्प. 44:18, 30-34.

15. यहूदा को क्या आशीषें मिली?

15 याकूब ने भविष्यवाणी की थी कि उसके सब बेटों में से यहूदा अगुवाई करेगा। लेकिन इस भविष्यवाणी के पूरा होने में बहुत वक्‍त लगता। करीब 200 साल बाद जाकर यह भविष्यवाणी पूरी होने लगी। जब इसराएली वीराने से होकर वादा किए गए देश की तरफ जा रहे थे, तब यहूदा का गोत्र सबसे आगे था। (गिन. 10:14) इसके कई साल बाद, जब कनानियों को वादा किए गए देश से खदेड़ना था, तो यहोवा ने उनसे लड़ने के लिए सबसे पहले यहूदा गोत्र के लोगों को भेजा। (न्यायि. 1:1, 2) आगे चलकर दाविद भी इसी गोत्र में पैदा हुआ और उस गोत्र में से वह सबसे पहला राजा बना। लेकिन याकूब ने जो भविष्यवाणी की थी, उसकी कुछ बातें आगे चलकर पूरी होतीं।

16. उत्पत्ति 49:10 में दी भविष्यवाणी कैसे पूरी हुई? (“ याकूब की भविष्यवाणी जो उसने मरने से पहले की थी” नाम का बक्स भी देखें।)

16 याकूब ने बताया कि यहूदा के खानदान से एक राजा आएगा, जो हमेशा तक राज करेगा। (उत्पत्ति 49:10 और फुटनोट पढ़िए।) वह राजा यीशु मसीह था जिसे याकूब ने शीलो कहा। यीशु के बारे में एक स्वर्गदूत ने कहा, “यहोवा परमेश्‍वर उसके पुरखे दाविद की राजगद्दी उसे देगा।” (लूका 1:32, 33) इसके अलावा बाइबल में यीशु को ‘यहूदा गोत्र का शेर’ भी कहा गया है।—प्रका. 5:5.

17. दूसरों के बारे में हमारा कैसा नज़रिया होना चाहिए, इस बारे में हम यहोवा से क्या सीख सकते हैं?

17 हम इससे क्या सीखते हैं? यहूदा ने कई गलतियाँ की थीं, पर फिर भी यहोवा ने उसे आशीष दी। यहूदा के भाई शायद सोच रहे होंगे कि यहोवा ने उसमें ऐसा क्या देखा। जो भी हो, यहोवा ने यहूदा में अच्छाई देखी और उसके लिए उसे आशीष दी। हम यहोवा की तरह कैसे बन सकते हैं? जब किसी भाई या बहन को कोई खास ज़िम्मेदारी मिलती है, तो हो सकता है हम सबसे पहले उसकी कमियों के बारे में सोचने लगें। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि यहोवा ने उसमें कुछ अच्छा देखा है और वह उससे खुश है। यहोवा हमेशा अपने सेवकों में अच्छा ही देखता है और हमें भी ऐसा ही करना चाहिए।

18. हमें क्यों सब्र रखना चाहिए?

18 हम यहूदा के किस्से से एक और सबक सीख सकते हैं। वह यह कि हमें सब्र रखना चाहिए। यहोवा हमेशा अपने वादे पूरे करता है, लेकिन अपने वक्‍त पर और अपने तरीके से। यहोवा ने वादा किया था कि यहूदा के वंशज अगुवाई करेंगे। लेकिन वे तुरंत अगुवाई नहीं करने लगे। उनसे पहले कुछ और अगुवे आए जिन्हें यहोवा ने चुना था। जैसे, मूसा जो लेवी के गोत्र से था, यहोशू जो एप्रैम के गोत्र से था और राजा शाऊल जो बिन्यामीन के गोत्र से था। यहूदा के गोत्र के लोगों ने इन सब अगुवों का साथ दिया। आइए हम भी उन लोगों का पूरा-पूरा साथ दें, जिन्हें यहोवा आज अगुवाई करने के लिए चुनता है।—इब्रा. 6:12.

19. याकूब की भविष्यवाणी से हमने यहोवा के बारे में क्या सीखा?

19 याकूब ने मरने से पहले जो भविष्यवाणी की, उससे हमने बहुत-सी बढ़िया बातें सीखीं। एक तो यह कि “परमेश्‍वर का देखना इंसान के देखने जैसा नहीं है।” (1 शमू. 16:7) यहोवा सब्र रखता है और माफ करता है। यह सच है कि वह बुरे कामों को बरदाश्‍त नहीं करता, लेकिन वह यह उम्मीद नहीं करता कि उसके सेवक कभी गलती नहीं करेंगे। और जिन लोगों ने गंभीर पाप किए हैं, अगर वे दिल से पश्‍चाताप करें और सही काम करें, तो यहोवा उन्हें माफ करता है और आशीषें भी देता है। अगले लेख में हम देखेंगे कि याकूब ने अपने बाकी आठ बेटों के बारे में क्या कहा।

गीत 124 हम निभाएँगे वफा