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अध्ययन लेख 27

गीत 79 उन्हें मज़बूत रहना सिखाएँ

यहोवा का सेवक बनने में विद्यार्थी की मदद कीजिए

यहोवा का सेवक बनने में विद्यार्थी की मदद कीजिए

“विश्‍वास में मज़बूत खड़े रहो . . . शक्‍तिशाली बनते जाओ।”1 कुरिं. 16:13.

क्या सीखेंगे?

परमेश्‍वर की सेवा करने का फैसला करने के लिए बाइबल विद्यार्थी को विश्‍वास और हिम्मत की ज़रूरत होती है। हम कैसे उसे अपना विश्‍वास बढ़ाने और हिम्मत से काम लेना सिखा सकते हैं?

1-2. (क) कुछ बाइबल विद्यार्थी परमेश्‍वर की सेवा करने का फैसला करने से क्यों हिचकिचाते हैं? (ख) इस लेख में हम किस बारे में चर्चा करेंगे?

 ज़रा सोचिए, जब आपने सच्चाई सीखी और यहोवा का साक्षी बनने की बात आयी, तो क्या हुआ था। क्या आप यह कदम उठाने से झिझक रहे थे? क्या आपको यह सोचकर डर लग रहा था कि साथ काम करनेवाले, आपके दोस्त या परिवारवाले आपके खिलाफ हो जाएँगे? या क्या आप यह सोच रहे थे कि यहोवा के स्तरों के मुताबिक जीना बहुत मुश्‍किल है, यह आपसे नहीं हो पाएगा? अगर आप यह सब सोच रहे थे, तो आप उन बाइबल विद्यार्थियों की कशमकश अच्छी तरह समझ सकते हैं जो यहोवा का साक्षी बनने से हिचकिचा रहे हैं।

2 यीशु जानता था कि इस तरह का डर एक व्यक्‍ति को यहोवा की सेवा करने से रोक सकता है। (मत्ती 13:20-22) लेकिन वह ऐसे लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटा। उसने जिस तरह लोगों को सिखाया, उससे हम सीख सकते हैं कि हम किस तरह अपने विद्यार्थियों की मदद कर सकते हैं। यीशु ने ये चार तरीके अपनाए: (1) उसने उन्हें बताया कि क्या बात उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है, (2) उसने उनके दिल में यहोवा के लिए प्यार बढ़ाया, (3) उसने उन्हें यहोवा को ज़िंदगी में पहली जगह देना सिखाया और (4) उनसे उन्हें सिखाया कि वे कैसे मुश्‍किलें पार कर सकते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि खुशी से जीएँ हमेशा के लिए! किताब से सिखाते वक्‍त हम कैसे यीशु की तरह अपने विद्यार्थियों की मदद कर सकते हैं, ताकि वे यहोवा की सेवा करने का फैसला करें।

समझाइए कि क्या बात विद्यार्थी को आगे बढ़ने से रोक रही है

3. यीशु का चेला बनने से नीकुदेमुस को क्या बात रोक रही थी?

3 नीकुदेमुस यहूदियों का एक बड़ा अधिकारी था। वह यीशु के काम देखकर समझ गया था कि उसे परमेश्‍वर ने भेजा है। (यूह. 3:1, 2) उस वक्‍त यीशु को अपनी सेवा शुरू किए करीब छ: महीने ही हुए थे। लेकिन एक बात नीकुदेमुस को यीशु का चेला बनने से रोक रही थी। वह ‘यहूदियों से डरता था,’ और इस वजह वह रात में छिपकर यीशु से मिलता था। (यूह. 7:13; 12:42) उसे शायद यह डर था कि अगर वह यीशु का चेला बना, तो उसे बहुत कुछ खोना पड़ेगा। a

4. यीशु ने नीकुदेमुस को यह समझने में कैसे मदद दी कि परमेश्‍वर उससे क्या चाहता है?

4 नीकुदेमुस को कानून का अच्छा ज्ञान था, लेकिन उसे यह समझने में मदद की ज़रूरत थी कि यहोवा उससे क्या चाहता है। यीशु ने कैसे उसकी मदद की? यीशु ने उसके साथ काफी समय बिताया और वह रात में जाकर उससे मिला। उसने नीकुदेमुस को साफ-साफ बताया कि उसका चेला बनने के लिए उसे क्या करना होगा: उसे अपने पापों का पश्‍चाताप करना होगा, पानी में बपतिस्मा लेना होगा और परमेश्‍वर के बेटे पर विश्‍वास करना होगा।—यूह. 3:5, 14-21.

5. आप अपने विद्यार्थी को कैसे समझा सकते हैं कि कौन-सी बात उसे यहोवा की सेवा करने से रोक रही है?

5 हो सकता है आपके विद्यार्थी को बाइबल की अच्छी समझ हो, लेकिन शायद उसे यह समझने में मदद की ज़रूरत हो कि क्या बात उसे यहोवा की सेवा करने से रोक रही है। हो सकता है, उसका सारा समय नौकरी में ही जा रहा हो या उसके परिवारवाले ना चाहते हों कि वह यहोवा का साक्षी बने। अगर ऐसा है, तो अपने विद्यार्थी के साथ वक्‍त बिताइए। आप चाहें तो उसे चाय पर बुला सकते हैं या उसके साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। इस तरह जब आप उसके साथ समय बिताएँगे, तो हो सकता है वह अपने बारे में आपको खुलकर बताए। तब आप समझ पाएँगे कि कौन-सी बात उसे यहोवा की सेवा करने से रोक रही है। और फिर आप उसे बता पाएँगे कि उसे किन मामलों में सुधार करने की ज़रूरत है। उसे यह भी बताइए कि वह ये सुधार आपको खुश करने के लिए नहीं, बल्कि यहोवा को खुश करने के लिए करे।

6. आप कैसे अपने विद्यार्थी का हौसला बढ़ा सकते हैं ताकि वह परमेश्‍वर की सेवा करने का फैसला करे? (1 कुरिंथियों 16:13)

6 जब विद्यार्थी को यकीन होगा कि यहोवा बाइबल के स्तरों के हिसाब से जीने में उसकी मदद करेगा, तो उसे हिम्मत मिलेगी और फिर वह उन स्तरों को मानेगा। (1 कुरिंथियों 16:13 पढ़िए।) ज़रा सोचिए, जब आप स्कूल जाया करते थे, तो आपको कैसा टीचर पसंद था? आपको ज़रूर वह टीचर पसंद होगा जो सिर्फ लेक्चर नहीं देता था, बल्कि सब्र से सिखाता था और आपका हौसला बढ़ाता था। आप भी ऐसा ही कर सकते हैं। अपने बाइबल विद्यार्थी को सिर्फ यह मत सिखाइए कि परमेश्‍वर उससे क्या चाहता है। इसके बजाय उसके साथ सब्र रखिए और उसे यकीन दिलाइए कि उसे जो सुधार करने हैं, उन्हें करने में यहोवा उसकी मदद करेगा। हम विद्यार्थी की मदद करने के लिए और क्या कर सकते हैं?

यहोवा के लिए उसका प्यार बढ़ाइए

7. यीशु ने लोगों के दिल में यहोवा के लिए प्यार कैसे बढ़ाया?

7 यीशु जानता था कि अगर उसके चेले यहोवा से प्यार करेंगे, तो वे उसकी बात मानेंगे। इसलिए यीशु अपने चेलों को ऐसी बातें सिखाता था जिससे यहोवा के लिए उनका प्यार बढ़ सके। जैसे उसने चेलों से कहा कि यहोवा एक पिता की तरह है जो अपने बच्चों को अच्छी चीज़ें देता है। (मत्ती 7:9-11) यीशु की बातें सुननेवालों में से कुछ लोग शायद ऐसे रहे होंगे जिनके पिता उनसे प्यार नहीं करते थे। ज़रा सोचिए, जब यीशु ने उन्हें खोए हुए बेटे की मिसाल दी, तो उन्हें कैसा लगा होगा। वह बेटा ऐयाशी की ज़िंदगी जीकर घर लौटा, लेकिन उसके पिता ने बहुत प्यार से उसका स्वागत किया। इस मिसाल से वे लोग समझ गए होंगे कि यहोवा अपने बच्चों से, यानी हम इंसानों से कितना प्यार करता है।—लूका 15:20-24.

8. आप अपने विद्यार्थी के दिल में यहोवा के लिए प्यार कैसे बढ़ा सकते हैं?

8 आप भी अपने विद्यार्थी के दिल में यहोवा के लिए प्यार बढ़ा सकते हैं। कैसे? उसे यहोवा के गुणों के बारे में सिखाइए। हर बार अध्ययन करते वक्‍त उसे यह समझने में मदद दीजिए कि वह जो सीख रहा है, उससे कैसे पता चलता है कि यहोवा उससे प्यार करता है। जैसे फिरौती के बारे में चर्चा करते वक्‍त आप उसे समझा सकते हैं कि यहोवा ने उसके लिए भी फिरौती दी है, क्योंकि वह उससे प्यार करता है। (रोमि. 5:8; 1 यूह. 4:10) जब विद्यार्थी इस बारे में सोचेगा कि यहोवा उससे कितना प्यार करता है, तो वह भी यहोवा से प्यार करने लगेगा।—गला. 2:20.

9. माइकल किस वजह से अपनी ज़िंदगी में बदलाव कर पाया?

9 इंडोनेशिया के रहनेवाले माइकल के उदाहरण पर गौर कीजिए। उसकी परवरिश सच्चाई में हुई थी, लेकिन उसने बपतिस्मा नहीं लिया। 18 की उम्र में वह विदेश जाकर ट्रक ड्राइवर की नौकरी करने लगा। बाद में उसकी शादी हो गयी। लेकिन वह अपने परिवार को इंडोनेशिया में छोड़कर विदेश में ही नौकरी करता रहा। इस बीच उसकी पत्नी और बेटी बाइबल अध्ययन करने लगे और वे जो सीख रहे थे उसे मानने लगे। कुछ वक्‍त बाद माइकल की मम्मी की मौत हो गयी और वह अपने पिता की देखभाल करने के लिए घर लौट आया। लौटने के बाद माइकल भी खुशी से जीएँ हमेशा के लिए! किताब से बाइबल अध्ययन करने लगा। जब पाठ 27 के “और जानिए” भाग पर चर्चा हो रही थी, तो एक बात उसके दिल को छू गयी। जब उसने इस बारे में सोचा कि यहोवा को अपने बेटे को तड़पता देखकर कितना दुख हुआ होगा, तो उसकी आँखें भर आयीं। उसका दिल फिरौती बलिदान के लिए एहसान से भर गया। फिर उसने सोच लिया कि वह अपनी ज़िंदगी में बदलाव करेगा और बपतिस्मा लेगा।

यहोवा को ज़िंदगी में पहली जगह देना सिखाइए

10. यीशु ने अपने कुछ चेलों को यह कैसे समझाया कि उन्हें प्रचार काम को पहली जगह देनी चाहिए? (लूका 5:5-11) (तसवीर भी देखें।)

10 यीशु के कुछ चेले तुरंत समझ गए थे कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए थे कि उन्हें प्रचार काम को पहली जगह देनी है। जैसे पतरस और अन्द्रियास यीशु के चेले बनने के बाद भी मछली पकड़ने के काम में लगे हुए थे। वे शायद याकूब और यूहन्‍ना के साथ मिलकर मछली का कारोबार कर रहे थे और अच्छा-खासा पैसा कमा रहे थे। (मर. 1:16-20) लेकिन फिर यीशु ने उन्हें अपने साथ पूरे समय की सेवा करने के लिए बुलाया। (मत्ती 4:18, 19) तब पतरस और अन्द्रियास “अपने जाल छोड़कर” उसके पीछे चल दिए। उन्होंने ज़रूर अपने परिवारवालों के लिए कुछ इंतज़ाम किया होगा ताकि उनका गुज़र-बसर हो सके। लेकिन सवाल है, वे अपना कारोबार छोड़कर यीशु के पीछे क्यों चलने लगे? लूका की किताब में बताया है कि यीशु ने यहोवा पर उनका भरोसा बढ़ाने के लिए एक चमत्कार किया। यह चमत्कार देखकर वे समझ पाए कि अगर वे यहोवा को पहली जगह देंगे, तो वह उनकी ज़रूरतों का खयाल रखेगा।—लूका 5:5-11 पढ़िए।

यीशु ने अपने चेलों को कैसे सिखाया कि उन्हें यहोवा को पहली जगह देनी चाहिए और उससे हम क्या सीख सकते हैं? (पैराग्राफ 10) b


11. हम अपना अनुभव बताकर अपने विद्यार्थी का विश्‍वास मज़बूत कैसे कर सकते हैं?

11 यीशु की तरह हम कोई चमत्कार नहीं कर सकते, लेकिन हम अपने विद्यार्थी को ऐसे अनुभव बता सकते हैं जिससे वह समझ पाए कि अगर हम यहोवा को अपनी ज़िंदगी में पहली जगह दें, तो वह हमें सँभालेगा। जैसे, आप उसे बता सकते हैं कि जब आपने सभाओं में आना शुरू किया था, तो यहोवा ने कैसे आपकी मदद की थी। हो सकता है, आपने अपने बॉस को बताया हो कि जिस दिन सभाएँ होती हैं, उस दिन आप देर तक काम नहीं कर सकते। अपने विद्यार्थी को यह भी बताइए कि यहोवा की उपासना को पहली जगह देने के लिए आपने जो फैसले लिए, उन पर यहोवा ने किस तरह आशीष दी और इससे आपका विश्‍वास कैसे मज़बूत हुआ।

12. (क) हमें क्यों अलग-अलग भाई-बहनों को अपने साथ बाइबल अध्ययन पर ले जाना चाहिए? (ख) आप वीडियो दिखाकर अपने विद्यार्थी को कैसे सिखा सकते हैं कि उसे यहोवा को पहली जगह देनी है? एक उदाहरण दीजिए।

12 दूसरे भाई-बहनों का अनुभव सुनकर भी आपके विद्यार्थी का विश्‍वास बढ़ सकता है। जब भाई-बहन यह बताएँगे कि उन्होंने कैसे यहोवा की उपासना को अपनी ज़िंदगी में पहली जगह दी है, तो इससे आपके विद्यार्थी को भी मदद मिलेगी। इसलिए अलग-अलग भाई-बहनों को अपने साथ बाइबल अध्ययन पर ले जाइए। उनसे कहिए कि वे विद्यार्थी को बताएँ कि वे कैसे सच्चाई में आए और यहोवा को ज़िंदगी में पहली जगह देने के लिए उन्होंने क्या किया। इसके अलावा, अपने विद्यार्थी के साथ मिलकर खुशी से जीएँ हमेशा के लिए! किताब के “और भी जानिए” भाग के वीडियो देखिए और आप चाहें तो “ये भी देखें” भाग में दिए कुछ वीडियो भी देख सकते हैं। जैसे आप पाठ 37 पर चर्चा करते वक्‍त यहोवा हमारी ज़रूरतें पूरी करेगा नाम का वीडियो देख सकते हैं और उसमें दिए सिद्धांतों पर उसके साथ चर्चा कर सकते हैं।

मुश्‍किलें पार करना सिखाइए

13. यीशु ने अपने चेलों को विरोध का सामना करने के लिए कैसे तैयार किया?

13 यीशु ने अपने चेलों को बार-बार बताया कि लोग, यहाँ तक कि उनके अपने रिश्‍तेदार भी उनका विरोध करेंगे। (मत्ती 5:11; 10:22, 36) अपनी सेवा के आखिर में उसने अपने चेलों से कहा कि लोग उनसे इतनी नफरत करेंगे कि वे उनकी जान भी ले सकते हैं। (मत्ती 24:9; यूह. 15:20; 16:2) उसने अपने चेलों से कहा कि वे प्रचार करते वक्‍त सतर्क रहें। उसने उन्हें बताया कि अगर कोई उनका विरोध करे तो वे बहस ना करें, बल्कि चुपचाप वहाँ से चले जाएँ और दूसरी जगह जाकर प्रचार करें।

14. हम अपने विद्यार्थी को विरोध का सामना करने के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं? (2 तीमुथियुस 3:12)

14 हम भी अपने विद्यार्थी को विरोध का सामना करने के लिए तैयार कर सकते हैं। हम उसे समझा सकते हैं कि साथ काम करनेवाले, उसके दोस्त या रिश्‍तेदार उससे क्या कहेंगे। (2 तीमुथियुस 3:12 पढ़िए।) हम उसे बता सकते हैं कि बाइबल पर विश्‍वास करने की वजह से शायद उसके साथ काम करनेवाले उसका मज़ाक उड़ाएँ या उसके रिश्‍तेदार उस पर ताने कसें। अच्छा होगा कि हम जल्द-से-जल्द अपने बाइबल विद्यार्थियों के साथ इस बारे में बात करें, ताकि जब भी उनका विरोध किया जाए तो वे अच्छी तरह इसका सामना कर पाएँ।

15. जब विद्यार्थी के परिवारवाले उसका विरोध करें, तो आप उसकी कैसे मदद कर सकते हैं?

15 अगर विद्यार्थी के परिवारवाले उसका विरोध कर रहे हैं, तो उससे कहिए कि वह इस बारे में सोचे कि वे क्यों नाराज़ हैं। हो सकता है, वे यह सोच रहे हों कि साक्षी उसे गुमराह कर रहे हैं। या यह भी हो सकता है कि उन्होंने यह सुन रखा हो कि यहोवा के साक्षी अच्छे लोग नहीं हैं। पर यह कोई नयी बात नहीं है। यीशु के रिश्‍तेदार भी उससे नाराज़ थे और उसे पागल समझ रहे थे। (मर. 3:21; यूह. 7:5) अपने बाइबल विद्यार्थी को सिखाइए कि वह दूसरों के साथ, खासकर अपने परिवारवालों के साथ सब्र रखे और सोच-समझकर बात करे।

16. हम विद्यार्थी को कैसे सिखा सकते हैं कि रिश्‍तेदारों से बात करते वक्‍त वह समझ से काम ले?

16 अपने विद्यार्थी को बताइए कि अगर उसके रिश्‍तेदार बाइबल के बारे में जानना चाहते हैं, तो वह उन्हें एक ही बार में सबकुछ ना बताए। ऐसा करने से वे परेशान हो सकते हैं और अगली बार बात करने से कतरा सकते हैं। इसके बजाय, विद्यार्थी को बताइए कि वह अपने रिश्‍तेदारों को थोड़ा-थोड़ा बताए। फिर वे आगे भी उसकी बात सुनना चाहेंगे। (कुलु. 4:6) उससे यह भी कहिए कि वह उन्हें jw.org वेबसाइट के बारे में बताए। इससे उसके रिश्‍तेदार साक्षियों के बारे में जो भी जानना चाहते हैं, जान सकते हैं।

17. आप विद्यार्थी को कैसे सिखा सकते हैं कि वह साक्षियों के बारे में पूछे जानेवाले सवालों के जवाब दे सके? (तसवीर भी देखें।)

17 आप चाहें तो अपने विद्यार्थी को jw.org वेबसाइट पर “यहोवा के साक्षियों के बारे में अकसर पूछे जानेवाले सवाल” शृंखला भी दिखा सकते हैं। इससे वह जान पाएगा कि वह साथ काम करनेवालों और रिश्‍तेदारों को उनके सवालों के जवाब कैसे दे सकता है। (2 तीमु. 2:24, 25) आप खुशी से जीएँ हमेशा के लिए! किताब के हर पाठ के आखिर में दिए “कुछ लोग कहते हैं” या “शायद कोई पूछे” भाग पर भी चर्चा कर सकते हैं। आप विद्यार्थी के साथ प्रैक्टिस कर सकते हैं कि वह कैसे अपने विश्‍वास के बारे में दूसरों को समझाएगा। उसे यह बताने से झिझकिए मत कि वह और अच्छी तरह कैसे जवाब दे सकता है। इस तरह प्रैक्टिस करने से वह पूरे यकीन के साथ अपने विश्‍वास के बारे में बता पाएगा।

अपने बाइबल विद्यार्थी के साथ प्रैक्टिस कीजिए कि वह दूसरों को कैसे प्रचार करेगा (पैराग्राफ 17) c


18. आप अपने विद्यार्थी को प्रचारक बनने का बढ़ावा कैसे दे सकते हैं? (मत्ती 10:27)

18 यीशु ने अपने चेलों से कहा था कि वे लोगों को खुशखबरी सुनाएँ। (मत्ती 10:27 पढ़िए।) जब आपका विद्यार्थी दूसरों को अपने विश्‍वास के बारे में बताएगा, तो वह यहोवा पर भरोसा रखना सीखेगा। इसलिए जल्द-से-जल्द उसे ऐसा करने का बढ़ावा दीजिए। इसके लिए आप क्या कर सकते हैं? जब मंडली में घोषणा की जाती है कि कुछ समय बाद प्रचार का एक अभियान रखा जाएगा, तो अपने विद्यार्थी से कहिए कि वह प्रचारक बनने के बारे में सोचे। उसे बताइए कि कई भाई-बहनों ने अभियान के दौरान ही प्रचार करना शुरू किया था और इस दौरान प्रचार करना काफी आसान होता है। आप उसे बढ़ावा दे सकते हैं कि वह हफ्ते के बीच होनेवाली सभा में विद्यार्थी भाग पेश करने के बारे में भी सोचे। इस तरह उसे लोगों से अच्छी तरह बातचीत करने की ट्रेनिंग मिलेगी।

दिखाइए कि आपको विद्यार्थी पर यकीन है

19. यीशु ने कैसे दिखाया कि उसे अपने चेलों पर भरोसा है और हम यीशु की तरह कैसे बन सकते हैं?

19 स्वर्ग जाने से पहले यीशु ने अपने चेलों से कहा कि वह उनसे दोबारा मिलेगा और वे एक साथ रहेंगे। लेकिन चेले उसकी बात समझ नहीं पाए कि एक दिन वे भी स्वर्ग जाएँगे और उसके साथ रहेंगे। वे उसकी बात पर शक करने लगे। लेकिन यीशु ने उनकी इस कमी पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि इस बात पर ध्यान दिया कि वे उसके वफादार हैं। (यूह. 14:1-5, 8) यीशु जानता था कि उसके चेलों को कुछ बातें समझने में वक्‍त लगेगा, जैसे यह कि उन्हें स्वर्ग जाने की आशा है। (यूह. 16:12) हम भी यीशु की तरह बन सकते हैं। हम दिखा सकते हैं कि हमें अपने विद्यार्थी पर भरोसा है कि वह यहोवा को खुश करना चाहता है।

विद्यार्थी को बढ़ावा दीजिए कि वह जल्द-से-जल्द अपने विश्‍वास के बारे में दूसरों को बताए, इस तरह वह यहोवा पर भरोसा रखना सीखेगा

20. मलावी की एक बहन ने कैसे दिखाया कि उसे अपने बाइबल विद्यार्थी पर भरोसा है?

20 हमें यकीन रखना चाहिए कि हमारा बाइबल विद्यार्थी सही कदम उठाना चाहता है। ज़रा मलावी में रहनेवाली हमारी बहन चिफूंडो के उदाहरण पर ध्यान दीजिए। उसने ऐलीनाफे नाम की एक कैथोलिक लड़की के साथ खुशी से जीएँ हमेशा के लिए! किताब से बाइबल अध्ययन शुरू किया। पाठ 14 खत्म करने के बाद उसने ऐलीनाफे से पूछा कि उसे क्या लगता है, क्या परमेश्‍वर की उपासना करने के लिए मूर्तियों का सहारा लेना सही होगा। ऐलीनाफे को यह बात अच्छी नहीं लगी और उसने कहा, “यह तो सबका अपना फैसला है।” चिफूंडो को लगा कि ऐलीनाफे बाइबल अध्ययन करना बंद कर देगी। लेकिन चिफूंडो ने सब्र रखा और वह उसके साथ अध्ययन करती रही। उसने भरोसा रखा कि एक दिन ऐलीनाफे यह बात समझ जाएगी कि मूर्तियों का सहारा लेना गलत है। कुछ महीनों बाद चिफूंडो ने ऐलीनाफे से पाठ 34 में दिया यह सवाल किया, “अब तक आपने बाइबल के बारे में और सच्चे परमेश्‍वर के बारे में जो कुछ सीखा है, उससे आपको क्या फायदा हुआ है?” इस पर ऐलीनाफे ने जो जवाब दिया, उस बारे में चिफूंडो बताती है, “उसने बहुत सारी बढ़िया बातें बतायीं। उनमें से एक यह थी कि यहोवा के साक्षी ऐसा कोई काम नहीं करते जिसे बाइबल में गलत बताया गया है।” इसके कुछ ही समय बाद ऐलीनाफे ने मूर्तियों की उपासना करना छोड़ दिया और बपतिस्मा ले लिया।

21. हम अपने बाइबल विद्यार्थी की कैसे मदद कर सकते हैं, ताकि वह यहोवा की सेवा करने का फैसला करे?

21 यह सच है कि यहोवा एक व्यक्‍ति के दिल में सच्चाई का बीज “बढ़ाता है,” लेकिन बाइबल विद्यार्थी की तरक्की में हमारा भी हाथ होता है। (1 कुरिं. 3:7) हम उसे सिर्फ यह नहीं सिखाते कि परमेश्‍वर उससे क्या चाहता है, बल्कि यहोवा के लिए प्यार बढ़ाने में भी उसकी मदद करते हैं। हम उसे बढ़ावा देते हैं कि वह यहोवा की उपासना को पहली जगह दे और दिखाए कि वह उससे कितना प्यार करता है। हम उसे यह भी सिखाते हैं कि मुश्‍किलें आने पर वह यहोवा पर भरोसा रखे। और जब हम दिखाते हैं कि हमें अपने विद्यार्थी पर भरोसा है कि वह यहोवा को खुश करना चाहता है, तो इससे उसका हौसला बढ़ेगा और फिर वह शायद यहोवा के स्तरों के मुताबिक जीने और उसकी सेवा करने का फैसला करे।

गीत 55 उनसे मत डर!

a यीशु से मिलने के करीब ढाई साल बाद भी नीकुदेमुस यहूदी महासभा का सदस्य था। (यूह. 7:45-52) कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वह यीशु की मौत के बाद ही उसका चेला बना।—यूह. 19:38-40.

b तसवीर के बारे में: पतरस और दूसरे मछुवारे अपना कारोबार छोड़कर यीशु के पीछे चलने को तैयार हैं।

c तसवीर के बारे में: एक बहन अपनी बाइबल विद्यार्थी के साथ प्रैक्टिस कर रही है कि वह दूसरों को कैसे प्रचार करेगी।