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अध्ययन लेख 26

गीत 123 यहोवा की हुकूमत कबूल करें

नम्र बनिए और यह मानिए कि कुछ बातें आप नहीं जानते

नम्र बनिए और यह मानिए कि कुछ बातें आप नहीं जानते

“सर्वशक्‍तिमान को समझना हमारे बस के बाहर है।”अय्यू. 37:23.

क्या सीखेंगे?

कभी-कभी हम यह सोचकर चिंता करते हैं कि पता नहीं आगे क्या होगा। ऐसे में अगर हम यहोवा पर भरोसा रखें, उन बातों पर ध्यान लगाएँ जिन्हें हम जानते हैं और नम्रता से कबूल करें कि कुछ बातें हैं जिन्हें हम नहीं जानते, तो हम अपनी चिंताओं का सामना कर पाएँगे।

1. यहोवा ने हमें कौन-सी काबिलीयतें दी हैं और क्यों?

 यहोवा ने हम इंसानों को लाजवाब तरीके से बनाया है। जैसे हम सोच सकते हैं, नयी-नयी बातें सीख सकते हैं और उसके हिसाब से काम कर सकते हैं। यहोवा ने हमें ये काबिलीयतें क्यों दी हैं? क्योंकि वह चाहता है कि हम “परमेश्‍वर का ज्ञान हासिल” करें और सोचने-समझने की शक्‍ति का इस्तेमाल करके उसकी सेवा करें।—नीति. 2:1-5; रोमि. 12:1.

2. (क) हमारी क्या सीमा है? (अय्यूब 37:23, 24) (तसवीर भी देखें।) (ख) अगर हम इस बात को मानें कि हम सबकुछ नहीं जानते, तो हमें क्या फायदा होगा?

2 यह सच है कि यहोवा ने हमें इस तरह बनाया है कि हम नयी-नयी बातें सीख सकते हैं, लेकिन हमारी एक सीमा है। वह यह कि ऐसी बहुत-सी बातें हैं जो हम नहीं जानते। (अय्यूब 37:23, 24 पढ़िए।) ज़रा अय्यूब के बारे में सोचिए। जब उससे एक-के-बाद-एक सवाल पूछे गए, तो उसे एहसास हुआ कि ऐसा बहुत कुछ है जो वह नहीं जानता। इसके बाद उसने नम्रता से कबूल किया कि वह गलत था और उसने अपनी सोच सुधारी। (अय्यू. 42:3-6) अय्यूब की तरह अगर हम भी इस बात को मानें कि हम सबकुछ नहीं जानते, तो हमें फायदा होगा। हम यहोवा पर भरोसा करना सीखेंगे और हमें इस बात का पूरा यकीन होगा कि अच्छे फैसले लेने के लिए वह हमें ऐसी हर बात बताएगा जिसे जानना हमारे लिए ज़रूरी है।—नीति. 2:6.

अय्यूब की तरह अगर हम यह कबूल करें कि ऐसी कुछ बातें हैं जो हम नहीं जानते, तो इससे हमारा ही भला होगा (पैराग्राफ 2)


3. इस लेख में हम किस बारे में चर्चा करेंगे?

3 इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि ऐसी कुछ बातें क्या हैं जिन्हें हम नहीं जानते और इस वजह से हमें किन मुश्‍किलों का सामना करना पड़ता है। हम यह भी देखेंगे कि यह क्यों अच्छा है कि हम कुछ बातें नहीं जानते। इन बातों पर चर्चा करने से यहोवा पर हमारा भरोसा बढ़ेगा, “जिसके पास सब बातों का पूरा ज्ञान है।” हमें यकीन हो जाएगा कि वह हमें वे बातें ज़रूर बताएगा जिन्हें जानना हमारे लिए ज़रूरी है।—अय्यू. 37:16.

हम नहीं जानते कि अंत कब आएगा

4. जैसा मत्ती 24:36 में बताया गया है, हम क्या नहीं जानते?

4 मत्ती 24:36 पढ़िए। हम नहीं जानते कि इस दुनिया का अंत कब होगा। जब यीशु इस धरती पर था, तो उसे भी “उस दिन और उस घड़ी” के बारे में नहीं पता था। a आगे चलकर उसने अपने प्रेषितों से कहा कि कुछ घटनाएँ कब घटेंगी, यह तय करने का “अधिकार” यहोवा ने अपने पास रखा है और हम जानते हैं कि यहोवा हर काम बिलकुल सही वक्‍त पर करता है। (प्रेषि. 1:6, 7) यहोवा ने पहले से तय कर रखा है कि वह किस दिन और किस घड़ी इस दुनिया का अंत करेगा। लेकिन हम नहीं जान सकते कि वह ठीक कब ऐसा करेगा।

5. हम नहीं जानते कि अंत कब आएगा, इस वजह से क्या हो सकता है?

5 हम नहीं जानते कि अंत आने में और कितना वक्‍त लगेगा। इसलिए यहोवा के दिन का इंतज़ार करना हमारे लिए मुश्‍किल हो सकता है। जैसे अगर हम लंबे समय से यहोवा की सेवा कर रहे हैं, तो शायद हम निराश हो जाएँ या बेसब्र होने लगें। या अगर हमारे परिवारवाले या दूसरे लोग हम पर ताने कसते हैं, तो उसे सहना शायद हमें बहुत मुश्‍किल लगे। (2 पत. 3:3, 4) ऐसे में हम शायद सोचने लगें, ‘काश! मुझे पता होता कि अंत ठीक किस दिन आएगा, तो मेरे लिए सब्र रखना थोड़ा आसान हो जाता और मैं सबकुछ सह लेता।’

6. यह क्यों अच्छा है कि हम नहीं जानते कि अंत कब आएगा?

6 यहोवा ने हमें अंत की तारीख नहीं बतायी है। इसलिए हमारे पास यह दिखाने का मौका है कि हम उससे कितना प्यार करते हैं और उस पर कितना भरोसा करते हैं। हम एक तारीख को ध्यान में रखकर यहोवा की सेवा नहीं करते। और ऐसा नहीं सोचते कि उस तारीख तक अंत नहीं आया, तो हम यहोवा पर विश्‍वास करना छोड़ देंगे। तो सिर्फ यह सोचते रहने के बजाय कि ‘यहोवा का दिन’ कब आएगा, हमें यह सोचना चाहिए कि जब वह दिन आएगा तो हमें क्या-क्या आशीषें मिलेंगी। अगर हम ऐसा करें, तो यहोवा पर हमारा भरोसा बढ़ेगा और हम उन कामों में लगे रहेंगे जिनसे उसका दिल खुश हो।—2 पत. 3:11, 12.

7. हम क्या जानते हैं?

7 ऐसी बहुत-सी बातें हैं जो हम जानते हैं और हमें उनके बारे में सोचना चाहिए। जैसे, 1914 से इस दुनिया के आखिरी दिन शुरू हो चुके हैं। यहोवा ने बाइबल में ऐसी कई भविष्यवाणियाँ दर्ज़ करवायी थीं जिनसे पता चलता है कि 1914 में आखिरी दिन शुरू हुए। इतना ही नहीं, यह भविष्यवाणी भी की गयी थी कि आखिरी दिनों में दुनिया के हालात कैसे होंगे। आज हम उन बातों को पूरा होते हुए देख रहे हैं, इसलिए हमें यकीन है कि “यहोवा का महान दिन करीब है।” (सप. 1:14) हम यह भी जानते हैं कि यहोवा हमसे क्या चाहता है। वह चाहता है कि हम ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों को ‘राज की खुशखबरी’ सुनाएँ। (मत्ती 24:14) आज यह खुशखबरी करीब 240 देशों में सुनायी जा रही है और वह भी 1,000 से ज़्यादा भाषाओं में। जोश से प्रचार करने के लिए यह ज़रूरी नहीं कि हमें पता हो कि अंत किस “दिन” और किस “घड़ी” आएगा।

हम नहीं जानते कि यहोवा कैसे कदम उठाएगा

8. “सच्चे परमेश्‍वर का काम,” इसका क्या मतलब है? (सभोपदेशक 11:5)

8 हम “सच्चे परमेश्‍वर का काम” पूरी तरह नहीं जानते। (सभोपदेशक 11:5 पढ़िए।) “सच्चे परमेश्‍वर का काम,” इसका क्या मतलब है? यहोवा अपनी मरज़ी पूरी करने के लिए जो भी करता है और जिन बातों के होने की इजाज़त देता है, वह सब उसके काम हैं। हम नहीं जान सकते कि कई बार यहोवा क्यों कुछ बातें होने देता है और कुछ मामलों में वह कैसे हमारी खातिर कदम उठाएगा। (भज. 37:5) ठीक जैसे बड़े-बड़े वैज्ञानिक आज तक नहीं जान पाए हैं कि माँ के पेट में बच्चा कैसे बढ़ता है, वैसे ही हम सच्चे परमेश्‍वर के कामों को पूरी तरह नहीं जान सकते।

9. हम नहीं जानते कि यहोवा हमारी खातिर कैसे कदम उठाएगा, इस वजह से क्या हो सकता है?

9 हम नहीं जानते कि यहोवा हमारी खातिर कैसे कदम उठाएगा, इस वजह से शायद हम कुछ फैसले लेने से हिचकिचाएँ। जैसे अपनी सेवा बढ़ाने के लिए शायद हम अपना जीवन सादा करने से कतराएँ या ऐसी जगह जाने से हिचकिचाएँ जहाँ प्रचारकों की ज़्यादा ज़रूरत है। हम नहीं जानते कि यहोवा हमारी खातिर कैसे कदम उठाएगा, इस वजह से हमें यह भी लग सकता है कि वह हमसे खुश नहीं है। जैसे, हो सकता है हमने यहोवा की सेवा में कुछ लक्ष्य रखे हों, लेकिन हम उन्हें हासिल नहीं कर पा रहे हैं या खूब मेहनत करने के बाद भी हमें प्रचार में अच्छे नतीजे नहीं मिल रहे हैं या फिर संगठन का कोई काम पूरा करने में हमें मुश्‍किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हमें लग सकता है कि यहोवा हमसे खुश नहीं है।

10. हम नहीं जानते कि यहोवा हमारी खातिर कैसे कदम उठाएगा, इस वजह से हमें क्या फायदे होते हैं?

10 हम नहीं जानते कि यहोवा हमारी खातिर कैसे कदम उठाएगा, इस वजह से हमें कुछ फायदे भी होते हैं। जैसे, हम नम्र होना सीखते हैं। हम समझ पाते हैं कि यहोवा की राहें और उसकी सोच हमसे कहीं ऊँची है। (यशा. 55:8, 9) इसके अलावा, हम यहोवा पर भरोसा करना भी सीखते हैं और यकीन रखते हैं कि वह हमारी मदद करेगा। जब हमें प्रचार काम में अच्छे नतीजे मिलते हैं या संगठन का कोई काम हम अच्छी तरह पूरा कर पाते हैं, तो हम उसका सारा श्रेय यहोवा को देते हैं। (भज. 127:1; 1 कुरिं. 3:7) और अगर सबकुछ वैसा नहीं होता, जैसे हमने उम्मीद की थी, तब भी हम भरोसा रखते हैं कि यहोवा सब देख रहा है और सब ठीक कर देगा। (यशा. 26:3) लेकिन हम अपनी तरफ से जो कर सकते हैं वह करते रहेंगे और यकीन रखेंगे कि बाकी सब यहोवा सँभाल लेगा। हो सकता है, वह बीते ज़माने की तरह कोई चमत्कार ना करे, लेकिन वह हमें सही राह ज़रूर दिखाएगा।—प्रेषि. 16:6-10.

11. हम यहोवा के बारे में क्या जानते हैं?

11 अब ज़रा सोचिए कि हम यहोवा के बारे में क्या जानते हैं। हम जानते हैं कि यहोवा प्यार करनेवाला परमेश्‍वर है, वह हमेशा सही न्याय करता है और बुद्धिमान है। हम जानते हैं कि हम उसके लिए और भाई-बहनों के लिए जो कुछ करते हैं, उसकी वह बहुत कदर करता है। और हम यह भी जानते हैं कि जो यहोवा के वफादार रहते हैं, वह उन्हें इनाम देता है।—इब्रा. 11:6.

हम नहीं जानते कि कल क्या होगा

12. जैसा याकूब 4:13, 14 में बताया है, हम क्या नहीं जानते?

12 याकूब 4:13, 14 पढ़िए। हमारी ज़िंदगी की एक सच्चाई यह है कि हम नहीं जानते कि कल हमारे साथ क्या होगा। इस दुनिया में हम पर कभी-भी ‘मुसीबत की घड़ी आ सकती है’ और हमारे साथ ‘हादसा हो सकता है।’ (सभो. 9:11) इसलिए हम नहीं जानते कि हमने जो सोचा है वह पूरा होगा भी या नहीं और उसे देखने के लिए हम ज़िंदा रहेंगे भी या नहीं।

13. हम नहीं जानते कि आगे क्या होगा, इस वजह से क्या मुश्‍किलें आ सकती हैं?

13 हम नहीं जानते कि कल जीवन में क्या होगा, इस वजह से हमारे सामने कुछ मुश्‍किलें आ सकती हैं। हम शायद यह सोचकर परेशान हो जाएँ कि हमारे साथ आगे क्या होगा और इस वजह से अपनी खुशी खो बैठें। इसके अलावा, अचानक कोई हादसा होने की वजह से शायद हम बहुत दुखी या परेशान हो जाएँ। और जब हमारी उम्मीदें पूरी ना हों, तो हम शायद बहुत निराश या हताश हो जाएँ।—नीति. 13:12.

14. हमारी खुशी किस बात पर निर्भर करती है? (तसवीरें भी देखें।)

14 जब हम मुश्‍किलों में धीरज धरते हैं, तो हम साबित करते हैं कि हमें यहोवा से प्यार है इसलिए हम उसकी सेवा करते हैं, ना कि अपने मतलब के लिए। बाइबल से हमने जाना है कि हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि यहोवा हमें हर मुश्‍किल से बचाएगा। हमने यह भी जाना है कि उसने पहले से नहीं लिख रखा है कि हमारे साथ क्या-क्या होगा। यहोवा जानता है कि हमारी खुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि हमें भविष्य के बारे में सबकुछ पता हो। इसके बजाय, यह इस बात पर निर्भर करती है कि हम उसकी बतायी राह पर चलें और उसकी आज्ञा मानें। (यिर्म. 10:23) इसलिए कोई भी फैसला लेते वक्‍त यहोवा पर भरोसा रखिए और याकूब जैसे बनिए जिसने लिखा, “अगर यहोवा की मरज़ी हो, तो हम कल का दिन देखेंगे और यह काम या वह काम करेंगे।”—याकू. 4:15.

यहोवा की आज्ञा मानने से और उसकी दिखायी राह पर चलने से हम सुरक्षित रहेंगे (पैराग्राफ 14-15) b


15. हम भविष्य के बारे में क्या जानते हैं?

15 बेशक हम यह नहीं जानते कि कल क्या होगा, लेकिन हम यहोवा के वादे ज़रूर जानते हैं। उसने वादा किया है कि वह हमें हमेशा की ज़िंदगी देगा, कुछ लोगों को स्वर्ग में और कुछ लोगों को इस धरती पर। हम यह भी जानते हैं कि वह झूठ नहीं बोल सकता और कोई भी उसे अपने वादे पूरे करने से नहीं रोक सकता। (तीतु. 1:2) सिर्फ यहोवा ही ऐसा परमेश्‍वर है जो पहले से हमें उन बातों का अंजाम बता सकता है ‘जो अब तक नहीं हुई हैं।’ बीते ज़माने में उसने जो कुछ बताया था वह सब सच हुआ और हमारे भविष्य के बारे में उसने जो भी बताया है वह भी सच होगा। (यशा. 46:10) हमें पूरा यकीन है कि कोई भी बात यहोवा को हमसे प्यार करने से नहीं रोक सकती। (रोमि. 8:35-39) यही नहीं, वह हमें बुद्धि देगा, दिलासा देगा और ताकत देगा ताकि हम हर मुश्‍किल को सह सकें। हमें यकीन है कि यहोवा हमारी मदद करेगा और हमें आशीषें देगा।—यिर्म. 17:7, 8.

हम नहीं समझ सकते कि यहोवा हमें कितनी अच्छी तरह जानते हैं

16. यहोवा हमारे बारे में क्या जानता है और इस बारे में सोचकर आपको कैसा लगता है? (भजन 139:1-6)

16 भजन 139:1-6 पढ़िए। हमारा सृष्टिकर्ता हमारी बनावट जानता है। वह जानता है कि आज हम जैसे हैं, वैसे क्यों हैं। उसे पता है कि हम क्या सोचते हैं और कैसा महसूस करते हैं। वह जानता है कि हम जो कहते हैं वह किस इरादे से कहते हैं और हम जो करते हैं वह क्यों करते हैं। दाविद ने कहा था कि वह हमें घेरे रहता है यानी हम पर ध्यान देता है और हमारी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। ज़रा सोचिए, यह कितनी बड़ी बात है कि स्वर्ग और धरती का बनानेवाला सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर यहोवा हम मामूली इंसानों पर ध्यान देता है! इस बारे में दाविद ने कहा, “तू मुझे कितनी बारीकी से जानता है, यह समझना मेरे बस के बाहर है। यह मेरी पहुँच से बाहर है।”—भज. 139:6.

17. हमें यह मानना क्यों मुश्‍किल लग सकता है कि यहोवा हमें अच्छी तरह जानता है?

17 हमारी परवरिश या संस्कृति की वजह से या हम पहले जो मानते थे, उस वजह से शायद हमें यह मानना मुश्‍किल लगे कि यहोवा एक प्यार करनेवाला पिता है और हमारी परवाह करता है। या हो सकता है, बीते समय में हमसे कुछ गलतियाँ हुई हों जिस वजह से हमें दाविद की तरह लगता हो कि यहोवा हमसे कोई रिश्‍ता नहीं रखना चाहेगा और वह हमसे बहुत दूर है। (भज. 38:18, 21) यह भी हो सकता है कि एक व्यक्‍ति बदचलन ज़िंदगी छोड़ने करने की बहुत कोशिश कर रहा है ताकि परमेश्‍वर को खुश कर सके। लेकिन उसके मन में शायद यह सवाल आए, ‘यहोवा मुझे इतनी अच्छी तरह जानता है, तो वह क्यों चाहता है कि मैं अपने जीने का तरीका बदलूँ? वह क्यों मुझे उन चीज़ों को छोड़ने को कहता है जो मुझे इतनी पसंद हैं?’

18. यह बात समझना क्यों ज़रूरी है कि यहोवा हमें हमसे बेहतर जानता है? (तसवीरें भी देखें।)

18 हमारे लिए यह समझना ज़रूरी है कि यहोवा हमें हमसे बेहतर जानता है और वह हममें उन अच्छाइयाँ को देखता है जिन्हें हम नहीं देख पाते। बेशक वह हमारी कमियाँ जानता है, लेकिन वह यह भी जानता है कि हममें वे कमियाँ क्यों हैं। उसे पता है कि हम बदल सकते हैं और ऐसा करने में वह प्यार से हमारी मदद करता है। (रोमि. 7:15) जब हम इस बात को समझते हैं कि यहोवा यह नहीं देखता कि हम कैसे इंसान हैं, बल्कि यह देखता है कि हम कैसे इंसान बन सकते हैं, तो हमारा मन करता है कि हम उसके वफादार रहें और खुशी से उसकी सेवा करें।

यहोवा ने एक खूबसूरत ज़िंदगी देने का जो वादा किया है, वह उस पर हमारा भरोसा बढ़ाता है। इस वजह से हम ज़िंदगी में आनेवाली हर मुश्‍किल झेल पाते हैं (पैराग्राफ 18-19) c


19. हम यहोवा के बारे में क्या जानते हैं?

19 हम जानते हैं कि यहोवा प्यार है और इस बात पर हमें पूरा यकीन है। (1 यूह. 4:8) हम जानते हैं कि उसने जो भी स्तर दिए हैं, प्यार की वजह से दिए हैं और वह हमारा भला चाहता है। हम जानते हैं कि यहोवा हमें हमेशा की ज़िंदगी देना चाहता है और इसके लिए उसने अपने बेटे का फिरौती बलिदान दिया है। फिरौती से हमें यकीन हो जाता है कि अपरिपूर्ण होने पर भी हम यहोवा को खुश कर सकते हैं। (रोमि. 7:24, 25) और हम यह भी जानते हैं कि “परमेश्‍वर हमारे दिलों से बड़ा है और सबकुछ जानता है।” (1 यूह. 3:19, 20) यहोवा हमारे बारे में अच्छी तरह जानता है और उसे पूरा यकीन है कि हम उसकी मरज़ी पूरी कर सकते हैं।

20. क्या बात याद रखने से हम बहुत ज़्यादा चिंता नहीं करेंगे?

20 यहोवा ने हमसे ऐसी कोई भी बात नहीं छिपायी है जिसे जानना हमारे लिए ज़रूरी है। अगर हम इस बात को समझें और नम्र रहें, तो हम बहुत ज़्यादा चिंता नहीं करेंगे और ज़्यादा अहमियत रखनेवाली बातों पर ध्यान दे पाएँगे। इस तरह हम दिखाएँगे कि हमें यहोवा पर भरोसा है “जिसके पास पूरा ज्ञान है।” (अय्यू. 36:4) यह सच है कि कई बातें हैं जिनके बारे में हम पूरी तरह नहीं जानते। लेकिन हमें नयी दुनिया का इंतज़ार है जब हम नयी-नयी बातें सीखेंगे और अपने महान परमेश्‍वर यहोवा को भी और अच्छी तरह जान पाएँगे।—सभो. 3:11.

गीत 104 सुन ले दुहाई, दे पवित्र शक्‍ति!

a यीशु अपनी सेना के साथ मिलकर शैतान की दुष्ट दुनिया का नाश करेगा। इसलिए यह कहना सही होगा कि अब वह जानता है कि हर-मगिदोन ठीक कब आएगा और कब वह ‘अपनी जीत पूरी करेगा।’—प्रका. 6:2; 19:11-16.

b तसवीर के बारे में: एक आदमी अपने बेटे के साथ मिलकर एक बैग तैयार कर रहा है, ताकि इमरजेंसी में उनके पास ज़रूरी चीज़ें हों।

c तसवीर के बारे में: एक भाई अपनी मुश्‍किलों की वजह से बड़ा परेशान है, लेकिन वह आनेवाली नयी दुनिया के बारे में सोच रहा है जब सब लोग खुशी से जीएँगे।